Complete Polity •• Complete Polity – Indian Constitution (SSC | UPSC | State PSC)

भारतीय संविधान - पूर्ण मार्गदर्शिका

भारतीय संविधान

भाग 1 से 4-क: पूर्ण मार्गदर्शिका

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📝 भाग 1: संघ और उसका राज्य क्षेत्र
Article 1 संघ का नाम और राज्य क्षेत्र
भारत, अर्थात् इंडिया, राज्यों का संघ होगा। राज्य और उनके राज्यक्षेत्र वे होंगे जो पहली अनुसूची में विनिर्दिष्ट हैं।
Article 2 नए राज्यों का प्रवेश या स्थापना
संसद कानून बनाकर नए राज्यों को भारतीय संघ में शामिल कर सकती है या नए राज्यों की स्थापना कर सकती है।
Article 3 राज्यों का निर्माण और परिवर्तन
संसद को किसी राज्य की सीमा घटाने, बढ़ाने, नाम बदलने या नए राज्य बनाने का पूरा अधिकार है।
Article 4 अनुसूची 1 और 4 का संशोधन
अनुच्छेद 2 और 3 के तहत बनाए गए कानूनों को अनुच्छेद 368 के तहत संविधान संशोधन नहीं माना जाएगा।
👤 भाग 2: नागरिकता
Article 5 प्रारंभ में नागरिकता
संविधान के प्रारंभ में भारत में रहने वाले और यहाँ जन्मे लोगों की नागरिकता के नियम।
Article 6 पाकिस्तान से आए व्यक्ति
पाकिस्तान से भारत आने वाले कुछ व्यक्तियों की नागरिकता के अधिकार।
Article 7 पाकिस्तान जाने वाले व्यक्ति
1 मार्च 1947 के बाद पाकिस्तान जाने वालों की नागरिकता का प्रावधान।
Article 8 भारत के बाहर रहने वाले भारतीय
विदेशों में रहने वाले भारतीय मूल के व्यक्तियों की नागरिकता के अधिकार।
Article 9 विदेशी नागरिकता
विदेशी राज्य की नागरिकता स्वेच्छा से लेने पर भारतीय नागरिकता का अंत हो जाना।
Article 10 नागरिकता की निरंतरता
प्रत्येक व्यक्ति जो भारत का नागरिक है, वह संसद के कानूनों के अधीन नागरिक बना रहेगा।
Article 11 संसद की शक्ति
संसद नागरिकता के अधिकार का कानून द्वारा नियमन करने की पूरी शक्ति रखती है।
🛡️ भाग 3: मौलिक अधिकार
Article 12 राज्य की परिभाषा
मौलिक अधिकारों के लागू होने के संदर्भ में 'राज्य' (State) का अर्थ स्पष्ट किया गया है।
Article 13 असंगत विधियां
वे कानून जो मौलिक अधिकारों का हनन करते हैं, उन्हें अवैध घोषित किया जाएगा।
Article 14 विधि के समक्ष समानता
भारत के राज्यक्षेत्र में कानून के सामने सभी व्यक्ति समान हैं।
Article 15 भेदभाव का निषेध
धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाएगा।
Article 16 सरकारी नौकरियों में समानता
लोक नियोजन (Public Employment) के विषयों में सभी को समान अवसर।
Article 17 अस्पृश्यता का अंत
छुआछूत का अंत और इसे दंडनीय अपराध घोषित किया गया है।
Article 18 उपाधियों का अंत
सैन्य और शैक्षणिक उपाधियों के अलावा अन्य सभी टाइटल पर रोक।
Article 19 स्वतंत्रता के 6 अधिकार
बोलने, सभा करने, घूमने और व्यापार करने की आजादी।
Article 20 दोषसिद्धि से संरक्षण
अपराधों के लिए सजा के संबंध में नागरिकों को प्राप्त कानूनी सुरक्षा।
Article 21 जीवन का अधिकार
किसी को भी उसके प्राण या दैहिक स्वतंत्रता से विधि के बिना वंचित नहीं किया जाएगा।
Article 21A शिक्षा का अधिकार
6 से 14 वर्ष के बच्चों को अनिवार्य और मुफ्त शिक्षा।
Article 22 गिरफ्तारी से सुरक्षा
हिरासत में लिए गए व्यक्तियों के कानूनी अधिकार।
Article 23 मानव तस्करी पर रोक
इंसानों के व्यापार और बंधुआ मजदूरी पर पूर्ण प्रतिबंध।
Article 24 बाल श्रम निषेध
कारखानों में बच्चों के काम करने पर रोक।
Article 25-28 धार्मिक स्वतंत्रता
किसी भी धर्म को मानने और उसके प्रचार की स्वतंत्रता।
Article 29-30 सांस्कृतिक और शिक्षा अधिकार
अल्पसंख्यकों के हितों और उनकी शिक्षा संस्थाओं का संरक्षण।
Article 31 संपत्ति का अधिकार (हटाया गया)
इसे अब कानूनी अधिकार बना दिया गया है (300A)।
Article 32 संवैधानिक उपचार
मौलिक अधिकारों को बचाने के लिए सीधे सुप्रीम कोर्ट जाने का हक (रिट जारी करना)।
Article 33-35 संसद की विशेष शक्तियां
बलों के अधिकार, मार्शल लॉ और मौलिक अधिकारों को प्रभावी बनाने के कानून।
📜 भाग 4: राज्य के नीति निदेशक तत्व (अनुच्छेद 36-51)
Article 36 परिभाषा
इसमें 'राज्य' की वही परिभाषा है जो भाग 3 के अनुच्छेद 12 में दी गई है।
Article 37 अंतर्विष्ट तत्वों का लागू होना
ये तत्व न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय (Enforceable) नहीं हैं, लेकिन शासन के लिए मूलभूत हैं।
Article 38 लोक कल्याण की अभिवृद्धि
राज्य ऐसी सामाजिक व्यवस्था बनाएगा जिससे सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय सुनिश्चित हो सके।
Article 39 राज्य द्वारा अनुसरणीय नीति
समान कार्य के लिए समान वेतन, संसाधनों का उचित वितरण और बालकों के लिए स्वास्थ्य विकास के अवसर।
Article 39A समान न्याय और निःशुल्क कानूनी सहायता
गरीबों को मुफ्त कानूनी सलाह और न्याय के समान अवसर सुनिश्चित करना।
Article 40 ग्राम पंचायतों का संगठन
राज्य ग्राम पंचायतों के गठन के लिए कदम उठाएगा और उन्हें आवश्यक शक्तियां प्रदान करेगा।
Article 41 काम, शिक्षा और लोक सहायता का अधिकार
बेकारी, बुढ़ापा, बीमारी और निशक्तता की स्थिति में सहायता प्रदान करना।
Article 42 न्यायसंगत कार्य दशाएं और प्रसूति सहायता
काम करने के लिए मानवीय परिस्थितियां और महिलाओं के लिए प्रसूति अवकाश (Maternity Relief) का प्रावधान।
Article 43 कर्मकारों के लिए निर्वाह मजदूरी
मजदूरों के लिए उचित वेतन, जीवन स्तर और कुटीर उद्योगों (Cottage Industries) को बढ़ावा देना।
Article 44 समान नागरिक संहिता (UCC)
पूरे भारत में सभी नागरिकों के लिए एक समान नागरिक कानून लागू करने का प्रयास करना।
Article 45 6 वर्ष से कम आयु के बच्चों की देखभाल
6 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए प्रारंभिक बाल्यावस्था देखरेख और शिक्षा का प्रबंध।
Article 46 SC/ST और दुर्बल वर्गों का हित
अनुसूचित जातियों, जनजातियों और कमजोर वर्गों के शिक्षा तथा आर्थिक हितों को बढ़ावा देना।
Article 47 पोषाहार स्तर और स्वास्थ्य
लोगों के जीवन स्तर और पोषण को सुधारना। नशीली दवाओं और शराब पर प्रतिबंध लगाना।
Article 48 कृषि और पशुपालन का संगठन
कृषि में आधुनिक तकनीकों का प्रयोग और दुधारू पशुओं (जैसे गाय, बछड़ा) के वध पर रोक।
Article 48A पर्यावरण, वन और वन्यजीवों का संरक्षण
देश के पर्यावरण की रक्षा करना और वनों तथा वन्यजीवों को सुरक्षित रखना।
Article 49 राष्ट्रीय स्मारकों का संरक्षण
राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों, स्थानों और वस्तुओं का संरक्षण करना।
Article 50 कार्यपालिका से न्यायपालिका का पृथक्करण
राज्य की लोक सेवाओं में न्यायपालिका को कार्यपालिका से अलग रखना।
Article 51 अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा
अंतर्राष्ट्रीय शांति को बढ़ावा देना और राष्ट्रों के बीच न्यायपूर्ण संबंधों को बनाए रखना।
⚖️ भाग 4-क: मौलिक कर्तव्य (अनुच्छेद 51-क)
नोट: स्रोत: पूर्व सोवियत संघ (USSR) | संशोधन: 42वां एवं 86वां
1
संविधान का पालन करें और उसके आदर्शों, संस्थाओं, राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान का आदर करें।
2
स्वतंत्रता के लिए हमारे राष्ट्रीय आंदोलन को प्रेरित करने वाले उच्च आदर्शों को हृदय में संजोए रखें और उनका पालन करें।
3
भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा करें और उसे अक्षुण्ण रखें।
4
देश की रक्षा करें और आह्वान किए जाने पर राष्ट्र की सेवा करें।
5
भारत के सभी लोगों में समरसता और समान भ्रातृत्व की भावना का निर्माण करें जो धर्म, भाषा और प्रदेश या वर्ग पर आधारित सभी भेदभाव से परे हो।
6
हमारी सामासिक संस्कृति (Composite Culture) की गौरवशाली परंपरा का महत्व समझें और उसका परिरक्षण करें।
7
प्राकृतिक पर्यावरण की, जिसके अंतर्गत वन, झील, नदी और वन्य जीव हैं, रक्षा करें और संवर्धन करें तथा प्राणिमात्र के प्रति दयाभाव रखें।
8
वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानववाद और ज्ञानार्जन तथा सुधार की भावना का विकास करें।
9
सार्वजनिक संपत्ति को सुरक्षित रखें और हिंसा से दूर रहें।
10
व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधियों के सभी क्षेत्रों में उत्कर्ष की ओर बढ़ने का सतत प्रयास करें जिससे राष्ट्र निरंतर बढ़ता रहे।
11
(शिक्षा का कर्तव्य): 6 से 14 वर्ष तक की आयु के अपने बच्चों को शिक्षा के अवसर प्रदान करना (86वें संशोधन द्वारा जोड़ा गया)।
"अधिकारों के बिना कर्तव्य अधूरे हैं और कर्तव्यों के बिना अधिकार।"
भाग 5: संघ (The Union) - राष्ट्रपति से संसद तक

राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति

Article 52भारत का राष्ट्रपति
भारत का एक राष्ट्रपति होगा जो देश का प्रथम नागरिक और संवैधानिक प्रधान होता है।
Article 53संघ की कार्यपालिका शक्ति
संघ की समस्त कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित होगी। वह इसका प्रयोग स्वयं या अपने अधीनस्थ अधिकारियों द्वारा करेगा।
Article 54राष्ट्रपति का निर्वाचन
राष्ट्रपति का चुनाव एक निर्वाचक मंडल (Electoral College) द्वारा होगा, जिसमें संसद और राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य शामिल होंगे।
Article 55निर्वाचन की पद्धति
राष्ट्रपति का चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत (Single Transferable Vote) द्वारा गुप्त मतदान से होगा।
Article 56राष्ट्रपति की पदावधि
राष्ट्रपति अपने पद ग्रहण की तारीख से 5 वर्ष की अवधि तक पद धारण करेगा।
Article 57पुनर्निर्वाचन के लिए पात्रता
कोई भी व्यक्ति जो राष्ट्रपति रह चुका है, वह दोबारा चुनाव लड़ने के लिए पात्र है।
Article 58राष्ट्रपति पद के लिए योग्यता
वह भारत का नागरिक हो, 35 वर्ष की आयु पूरी कर चुका हो और लोकसभा सदस्य बनने की योग्यता रखता हो।
Article 59पद की शर्तें
वह किसी भी लाभ के पद पर नहीं होगा और संसद या विधानमंडल का सदस्य नहीं रह सकता।
Article 60शपथ या प्रतिज्ञान
राष्ट्रपति को भारत का मुख्य न्यायाधीश (CJI) शपथ दिलाता है।
Article 61महाभियोग (Impeachment)
संविधान के उल्लंघन पर राष्ट्रपति को पद से हटाने की विशेष प्रक्रिया।
Article 62रिक्ति भरने का समय
राष्ट्रपति का कार्यकाल खत्म होने से पहले ही चुनाव कराना अनिवार्य है।
Article 63भारत का उपराष्ट्रपति
भारत का एक उपराष्ट्रपति होगा।
Article 64पदेन सभापति
उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन (Ex-officio) सभापति होगा।
Article 65कार्यकारी राष्ट्रपति
राष्ट्रपति की मृत्यु, त्यागपत्र या बीमारी की स्थिति में उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति के रूप में कार्य करेगा।
Article 66उपराष्ट्रपति का निर्वाचन
उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों के सभी सदस्यों द्वारा किया जाता है।
Article 67उपराष्ट्रपति की पदावधि
पद ग्रहण से 5 वर्ष तक। वह राज्यसभा के बहुमत से पारित संकल्प द्वारा हटाया जा सकता है।
Article 68उपराष्ट्रपति की रिक्ति
उपराष्ट्रपति का पद खाली होने पर उसे भरने के लिए चुनाव यथाशीघ्र कराए जाएंगे।
Article 69उपराष्ट्रपति की शपथ
उपराष्ट्रपति को राष्ट्रपति या उसके द्वारा नियुक्त व्यक्ति शपथ दिलाता है।
Article 70अन्य आकस्मिकताओं में राष्ट्रपति के कार्य
ऐसी परिस्थितियां जो संविधान में नहीं लिखी हैं, उनमें संसद राष्ट्रपति के कार्यों के लिए व्यवस्था कर सकती है।
Article 71चुनाव संबंधी मामले
राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के चुनाव से जुड़े विवादों का फैसला केवल उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) करेगा।
Article 72क्षमादान की शक्ति
राष्ट्रपति को मृत्युदंड को क्षमा करने, सजा कम करने या रोकने की शक्ति प्राप्त है।
Article 73कार्यपालिका शक्ति का विस्तार
संघ की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार उन विषयों तक होगा जिन पर संसद को कानून बनाने का अधिकार है।

प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद

Article 74मंत्रिपरिषद
राष्ट्रपति की सहायता और सलाह के लिए एक मंत्रिपरिषद होगी, जिसका प्रधान प्रधानमंत्री होगा।
Article 75मंत्रियों के उपबंध
PM की नियुक्ति राष्ट्रपति करेगा। मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होगी।
Article 76महान्यायवादी (Attorney General)
राष्ट्रपति भारत के महान्यायवादी की नियुक्ति करेगा, जो देश का सर्वोच्च कानूनी अधिकारी होगा।
Article 77सरकारी कार्य का संचालन
भारत सरकार के सभी कार्यपालक कार्य राष्ट्रपति के नाम से किए जाएंगे।
Article 78PM के कर्तव्य
प्रधानमंत्री का यह कर्तव्य है कि वह सरकार के निर्णयों की जानकारी राष्ट्रपति को दे।

संसद (Parliament)

Article 79संसद का गठन
संघ के लिए एक संसद होगी जो राष्ट्रपति, राज्यसभा (उच्च सदन) और लोकसभा (निम्न सदन) से मिलकर बनेगी।
Article 80राज्यसभा (Council of States)
इसमें अधिकतम 250 सदस्य हो सकते हैं (12 राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत और 238 राज्यों/UTs से)।
Article 81लोकसभा (House of the People)
लोकसभा के सदस्यों का चुनाव जनता द्वारा प्रत्यक्ष रूप से किया जाता है।
Article 82पुनर्संयोजन (Delimitation)
प्रत्येक जनगणना के बाद निर्वाचन क्षेत्रों का फिर से निर्धारण किया जाएगा।
Article 83सदनों की अवधि
राज्यसभा कभी भंग नहीं होती। लोकसभा का कार्यकाल सामान्यतः 5 वर्ष का होता है।
Article 84सदस्यों के लिए योग्यता
राज्यसभा के लिए 30 वर्ष और लोकसभा के लिए 25 वर्ष की आयु अनिवार्य है।
Article 85संसद के सत्र
राष्ट्रपति सत्र बुलाता है, सत्रावसान करता है और लोकसभा को भंग कर सकता है।
Article 86संबोधन का अधिकार
राष्ट्रपति को संसद के किसी भी सदन को संबोधित करने और संदेश भेजने का अधिकार है।
Article 87विशेष अभिभाषण
आम चुनाव के बाद पहले सत्र और हर साल के पहले सत्र में राष्ट्रपति का विशेष संबोधन।
Article 88मंत्रियों और महान्यायवादी के अधिकार
वे सदन की कार्यवाही में भाग ले सकते हैं, लेकिन महान्यायवादी वोट नहीं दे सकता।
Article 89राज्यसभा के पदाधिकारी
उपराष्ट्रपति पदेन सभापति होगा और राज्यसभा अपना एक उपसभापति चुनेगी।
Article 90उपसभापति की रिक्ति
उपसभापति का पद त्याग या उसे हटाने की प्रक्रिया।
Article 91सभापति के कर्तव्यों का पालन
सभापति की अनुपस्थिति में उपसभापति या अन्य सदस्य का कार्य करना।
Article 92पीठासीन न होना
जब सभापति या उपसभापति को हटाने का संकल्प विचाराधीन हो, तो वे सदन की अध्यक्षता नहीं करेंगे।
Article 93लोकसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष
लोकसभा अपने सदस्यों में से एक अध्यक्ष (Speaker) और एक उपाध्यक्ष (Deputy Speaker) चुनेगी।
Article 94अध्यक्ष का पद त्याग
अध्यक्ष अपना इस्तीफा उपाध्यक्ष को और उपाध्यक्ष अपना इस्तीफा अध्यक्ष को देता है।
Article 95अध्यक्ष के कर्तव्यों का पालन
अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष द्वारा कार्यों का निर्वहन।
Article 96अध्यक्ष का पीठासीन न होना
हटाने का प्रस्ताव होने पर अध्यक्ष सदन की अध्यक्षता नहीं करेगा (वोटिंग के समय सामान्य सदस्य की तरह रहेगा)।
Article 97वेतन और भत्ते
सभापति, उपसभापति, अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के वेतन और भत्ते जो संसद द्वारा निर्धारित हों।
Article 98संसद का सचिवालय
संसद के प्रत्येक सदन के लिए अलग सचिवालय स्टाफ होगा।
Article 99सदस्यों द्वारा शपथ
प्रत्येक सदस्य राष्ट्रपति या उसके द्वारा नियुक्त व्यक्ति के समक्ष शपथ लेगा।
Article 100मतदान और कोरम
सदनों में फैसले बहुमत से होंगे। कोरम (गणपूर्ति) के लिए 1/10 सदस्यों की उपस्थिति अनिवार्य है।

संसद: अयोग्यताएं (101-106)

Article 101स्थानों का रिक्त होना
संसद के दोनों सदनों की सदस्यता पर रोक और सीटों के खाली होने की परिस्थितियाँ।
Article 102सदस्यता के लिए अयोग्यताएं
लाभ का पद, दिवालियापन या विदेशी राज्य की नागरिकता लेने पर अयोग्यता।
Article 103अयोग्यता के प्रश्नों पर निर्णय
सदस्यों की अयोग्यता पर राष्ट्रपति निर्वाचन आयोग की सलाह लेकर अंतिम फैसला करेगा।
Article 104अनुच्छेद 99 के अधीन शपथ से पहले बैठने पर शास्ति
बिना शपथ लिए या अयोग्य होने पर सदन की कार्यवाही में भाग लेने पर जुर्माना।
Article 105संसद के सदनों और सदस्यों की शक्तियां व विशेषाधिकार
संसद में बोलने की स्वतंत्रता और कानूनी कार्यवाही से सुरक्षा।
Article 106सदस्यों के वेतन और भत्ते
संसद सदस्यों को समय-समय पर मिलने वाले वेतन का निर्धारण।

विधायी प्रक्रिया: Bills (107-111)

Article 107विधेयकों को पेश करने और पारित करने के उपबंध
साधारण विधेयक संसद के किसी भी सदन में शुरू किया जा सकता है।
Article 108दोनों सदनों की संयुक्त बैठक (Joint Sitting)
विधेयक पर सहमति न बनने पर राष्ट्रपति दोनों सदनों का संयुक्त अधिवेशन बुला सकता है।
Article 109धन विधेयकों के संबंध में विशेष प्रक्रिया
धन विधेयक केवल लोकसभा में पेश होंगे, राज्यसभा के पास सीमित अधिकार हैं।
Article 110धन विधेयक (Money Bill) की परिभाषा
कर (Tax), ऋण या संचित निधि से संबंधित विषयों की परिभाषा।
Article 111विधेयकों पर राष्ट्रपति की अनुमति
राष्ट्रपति विधेयक को अनुमति देता है, रोक सकता है या वापस भेज सकता है।

वित्तीय बजट प्रक्रिया (112-117)

Article 112वार्षिक वित्तीय विवरण (Budget)
भारत सरकार के अनुमानित आय और व्यय का वार्षिक लेखा-जोखा।
Article 113प्राकलनों के संबंध में प्रक्रिया
संसद में अनुदान की मांगों पर चर्चा और मतदान।
Article 114विनियोग विधेयक (Appropriation Bill)
संचित निधि से धन खर्च करने के लिए संसद की अनुमति का कानून।
Article 115अनुपूरक, अतिरिक्त या अधिक अनुदान
निर्धारित राशि से अधिक खर्च होने पर संसद से अतिरिक्त मंजूरी।
Article 116लेखानुदान, प्रत्ययानुदान और अपवादानुदान
विशेष परिस्थितियों में अग्रिम धन राशि (Vote on Account) की मंजूरी।
Article 117वित्त विधेयकों के बारे में विशेष उपबंध
Financial Bills के पेश करने और पारित करने के नियम।

संसद की कार्य प्रक्रिया (118-122)

Article 118प्रक्रिया के नियम
प्रत्येक सदन अपने कार्य संचालन के लिए खुद नियम बनाएगा।
Article 119वित्तीय कार्य के लिए विनियमन
वित्तीय कार्य को समय पर पूरा करने के लिए संसद की विधि।
Article 120संसद में प्रयोग की जाने वाली भाषा
संसद में कार्य हिंदी या अंग्रेजी में होगा।
Article 121संसद में चर्चा पर निर्बंधन
सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के जजों के कर्तव्यों पर चर्चा की मनाही।
Article 122न्यायालयों द्वारा जांच न किया जाना
संसद की कार्यवाही की जांच न्यायालय नहीं करेगा।

विधायी शक्ति (123)

Article 123अध्यादेश जारी करने की शक्ति
संसद सत्र में न होने पर राष्ट्रपति द्वारा तत्काल कानून बनाने की शक्ति।

संघीय न्यायपालिका (124-147)

Article 124SC की स्थापना और गठन
भारत का एक सुप्रीम कोर्ट होगा, जिसमें मुख्य न्यायाधीश और अन्य न्यायाधीश होंगे।
Article 125न्यायाधीशों के वेतन आदि
जजों के वेतन और सेवा शर्तों का निर्धारण।
Article 126कार्यकारी मुख्य न्यायमूर्ति की नियुक्ति
CJI का पद रिक्त होने पर एक्टिंग मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति।
Article 127तदर्थ (Ad hoc) न्यायाधीशों की नियुक्ति
जरूरत पड़ने पर हाई कोर्ट के जजों को अस्थाई रूप से बुलाना।
Article 128सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की उपस्थिति
रिटायर्ड जजों का सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही में भाग लेना।
Article 129अभिलेख न्यायालय (Court of Record)
सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों का साक्ष्य के रूप में प्रयोग और अवमानना पर दंड।
Article 130उच्चतम न्यायालय का स्थान
सुप्रीम कोर्ट दिल्ली में या राष्ट्रपति की मंजूरी से अन्य स्थान पर।
Article 131मूल अधिकारिता
केंद्र-राज्य विवादों को सीधे सुनने का विशेष अधिकार।
Article 132संवैधानिक मामलों में अपील
संविधान की व्याख्या से संबंधित मामलों में हाई कोर्ट से अपील।
Article 133दीवानी मामलों में अपील
सिविल मुकदमों में उच्चतम न्यायालय में अपील की प्रक्रिया।
Article 134दांडिक (फौजदारी) मामलों में अपील
क्रिमिनल मामलों में हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील।
Article 134Aअपील के लिए प्रमाण पत्र
हाई कोर्ट द्वारा SC में अपील करने के लिए सर्टिफिकेट देने का नियम।
Article 135संघीय न्यायालय की शक्तियों का प्रयोग
पुरानी व्यवस्था के तहत संघीय न्यायालय के अधिकारों का SC में हस्तांतरण।
Article 136अपील के लिए विशेष इजाजत (SLP)
सुप्रीम कोर्ट किसी भी कोर्ट के आदेश के खिलाफ विशेष अपील की इजाजत दे सकता है।
Article 137निर्णयों का पुनर्विलोकन (Review)
सुप्रीम कोर्ट को अपने खुद के आदेशों की समीक्षा करने की शक्ति।
Article 138क्षेत्राधिकार में वृद्धि
संसद कानून बनाकर सुप्रीम कोर्ट की शक्तियों को बढ़ा सकती है।
Article 139रिट जारी करने की शक्ति का विस्तार
मूल अधिकारों के अलावा अन्य उद्देश्यों के लिए भी रिट जारी करना।
Article 139Aकुछ मामलों का अंतरण (Transfer)
जरूरी मामलों को हाई कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट में मंगाने की शक्ति।
Article 140उच्चतम न्यायालय की आनुषंगिक शक्तियां
संसद SC को प्रभावी बनाने के लिए सहायक शक्तियां दे सकती है।
Article 141SC के कानून बाध्यकारी होना
सुप्रीम कोर्ट के नियम भारत के सभी कोर्ट पर लागू होंगे।
Article 142पूर्ण न्याय (Complete Justice)
न्याय के हित में सुप्रीम कोर्ट कोई भी आदेश जारी कर सकता है।
Article 143राष्ट्रपति की परामर्श शक्ति
राष्ट्रपति सुप्रीम कोर्ट से किसी भी कानूनी मामले पर सलाह मांग सकता है।
Article 144सिविल और न्यायिक अधिकारियों की सहायता
भारत के सभी अधिकारी सुप्रीम कोर्ट की मदद में कार्य करेंगे।
Article 144A[निरस्त]
इसे 43वें संशोधन द्वारा हटा दिया गया है।
Article 145न्यायालय के नियम आदि
सुप्रीम कोर्ट अपनी कार्यप्रणाली के लिए नियम स्वयं बनाएगा।
Article 146अधिकारी और सेवक
SC के कर्मचारियों की नियुक्ति और खर्च का प्रबंधन।
Article 147व्याख्या
संविधान की व्याख्या संबंधी नियमों का स्पष्टीकरण।

भारत का CAG (148-151)

Article 148CAG की नियुक्ति और शपथ
भारत का एक नियंत्रक-महालेखा परीक्षक होगा, जो सार्वजनिक धन का संरक्षक है।
Article 149CAG के कर्तव्य और शक्तियां
केंद्र और राज्यों के खातों की ऑडिट करने की जिम्मेदारी।
Article 150लेखाओं का स्वरूप (Format)
सरकार के खातों को किस प्रारूप में रखा जाएगा, इसकी सलाह राष्ट्रपति को देना।
Article 151संपरीक्षा प्रतिवेदन (Audit Report)
CAG अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति को सौपेंगा, जिसे संसद में पेश किया जाएगा।
भाग 6: राज्य (The States) - राज्यपाल से विधेयक तक

साधारण (General)

Article 152परिभाषा
इस भाग में "राज्य" शब्द का अर्थ स्पष्ट किया गया है (जम्मू-कश्मीर के विशेष संदर्भ के साथ, जो अब बदल चुका है)।

कार्यपालिका: राज्यपाल (Art 153-162)

Article 153राज्यों के राज्यपाल
प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्यपाल होगा। एक ही व्यक्ति दो या दो से अधिक राज्यों का राज्यपाल भी हो सकता है।
Article 154राज्य की कार्यपालिका शक्ति
राज्य की कार्यपालिका शक्ति राज्यपाल में निहित होगी और वह इसका प्रयोग संविधान के अनुसार करेगा।
Article 155राज्यपाल की नियुक्ति
राज्य के राज्यपाल की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाएगी।
Article 156राज्यपाल की पदावधि
राज्यपाल राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत (Pleasure of President) पद धारण करेगा, सामान्यतः यह अवधि 5 वर्ष होती है।
Article 157राज्यपाल के लिए योग्यताएं
वह भारत का नागरिक हो और 35 वर्ष की आयु पूरी कर चुका हो।
Article 158पद की शर्तें
वह संसद या विधानमंडल का सदस्य नहीं होगा और कोई लाभ का पद धारण नहीं करेगा।
Article 159राज्यपाल द्वारा शपथ
संबंधित राज्य के उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश राज्यपाल को शपथ दिलाएगा।
Article 160आकस्मिकताओं में राज्यपाल के कार्य
विशेष परिस्थितियों में राज्यपाल के कार्यों के लिए राष्ट्रपति प्रावधान कर सकता है।
Article 161क्षमादान की शक्ति
राज्यपाल को राज्य विधि के विरुद्ध अपराधों के लिए सजा कम करने या क्षमा करने की शक्ति है (लेकिन मृत्युदंड नहीं)।
Article 162राज्य कार्यपालिका शक्ति का विस्तार
राज्य की शक्ति उन विषयों तक होगी जिन पर राज्य विधानमंडल को कानून बनाने का अधिकार है।

मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद (Art 163-167)

Article 163राज्यपाल को सलाह देने के लिए परिषद
राज्यपाल की सहायता के लिए एक मंत्रिपरिषद होगी जिसका प्रधान मुख्यमंत्री होगा।
Article 164मंत्रियों के बारे में अन्य उपबंध
मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल करेगा और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति मुख्यमंत्री की सलाह पर होगी।
Article 165राज्य का महाधिवक्ता (Advocate General)
राज्यपाल राज्य के लिए महाधिवक्ता नियुक्त करेगा, जो राज्य का सर्वोच्च कानूनी सलाहकार होगा।
Article 166राज्य सरकार के कार्य का संचालन
राज्य सरकार की सभी कार्यपालक कार्यवाही राज्यपाल के नाम से की जाएगी।
Article 167मुख्यमंत्री के कर्तव्य
राज्यपाल को राज्य के शासन और विधायी प्रस्तावों की जानकारी देना CM का कर्तव्य है।

राज्य विधानमंडल (Art 168-200)

Article 168विधानमंडलों का गठन
राज्यों में राज्यपाल और एक या दो सदनों (विधानसभा/विधान परिषद) से मिलकर विधानमंडल बनेगा।
Article 169विधान परिषदों का सृजन या उत्सादन
संसद किसी राज्य में विधान परिषद को बनाने या खत्म करने का अधिकार रखती है।
Article 170विधानसभाओं की संरचना
प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा चुने गए अधिकतम 500 और न्यूनतम 60 सदस्यों का प्रावधान।
Article 171विधान परिषदों की संरचना
उच्च सदन के सदस्यों का अप्रत्यक्ष चुनाव और राज्यपाल द्वारा नामांकन।
Article 172विधानमंडलों की अवधि
विधानसभा 5 साल के लिए होती है, जबकि विधान परिषद एक स्थायी सदन है।
Article 173सदस्यता के लिए योग्यता
विधानसभा के लिए 25 वर्ष और विधान परिषद के लिए 30 वर्ष की आयु अनिवार्य है।
Article 174सत्र, सत्रावसान और विघटन
राज्यपाल विधानमंडल का सत्र बुलाता है और विधानसभा को भंग कर सकता है।
Article 175संबोधित करने का राज्यपाल का अधिकार
राज्यपाल सदनों में भाषण दे सकता है और संदेश भेज सकता है।
Article 176राज्यपाल का विशेष अभिभाषण
प्रत्येक चुनाव के बाद और साल के पहले सत्र में राज्यपाल का विशेष संबोधन।
Article 177मंत्रियों और महाधिवक्ता के अधिकार
वे सदनों में बोल सकते हैं, पर यदि वे सदस्य नहीं हैं तो वोट नहीं दे सकते।
Article 178विधानसभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष
विधानसभा अपने सदस्यों में से एक स्पीकर और एक डिप्टी स्पीकर चुनेगी।
Article 179अध्यक्ष/उपाध्यक्ष का पद रिक्त होना
इस्तीफा देने या हटाए जाने की प्रक्रिया।
Article 180अध्यक्ष के रूप में कार्य करने की शक्ति
अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष द्वारा कार्यों का संचालन।
Article 181पीठासीन न होना
हटाने का संकल्प विचाराधीन होने पर अध्यक्षता न करना।
Article 182विधान परिषद के सभापति और उपसभापति
विधान परिषद अपने सदस्यों में से सभापति और उपसभापति चुनेगी।
Article 183सभापति/उपसभापति का पद त्याग
इस्तीफा या पद से हटाने संबंधी नियम।
Article 184सभापति के कर्तव्यों का पालन
सभापति की अनुपस्थिति में उपसभापति द्वारा कार्य संचालन।
Article 185सभापति का पीठासीन न होना
हटाने का प्रस्ताव होने पर अध्यक्षता से रोक।
Article 186वेतन और भत्ते
अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सभापति और उपसभापति के वेतन का निर्धारण।
Article 187विधानमंडल का सचिवालय
प्रत्येक सदन का अपना पृथक सचिवालय स्टाफ होगा।
Article 188सदस्यों द्वारा शपथ
विधानमंडल के सदस्य राज्यपाल के समक्ष शपथ लेंगे।
Article 189सदनों में मतदान और कोरम
बहुमत से निर्णय और कार्यवाही के लिए 1/10 सदस्यों की उपस्थिति (कोरम) अनिवार्य।
Article 190स्थानों का रिक्त होना
दोहरी सदस्यता या त्यागपत्र के कारण सीट खाली होना।
Article 191सदस्यता के लिए अयोग्यताएं
लाभ का पद या अन्य संवैधानिक आधारों पर अयोग्यता।
Article 192अयोग्यता के प्रश्नों पर निर्णय
राज्यपाल निर्वाचन आयोग की राय लेकर अंतिम निर्णय करेगा।
Article 193बिना शपथ लिए बैठने पर शास्ति
शपथ के बिना कार्यवाही में भाग लेने पर जुर्माना।
Article 194विशेषाधिकार
सदन में बोलने की आजादी और सदस्यों की कानूनी सुरक्षा।
Article 195वेतन और भत्ते
विधानमंडल के सदस्यों के वेतन का कानून द्वारा निर्धारण।
Article 196विधेयकों को पारित करने के उपबंध
साधारण विधेयकों को किसी भी सदन में पेश करने की प्रक्रिया।
Article 197विधान परिषद की शक्तियों पर निर्बंधन
साधारण विधेयकों के मामले में विधान परिषद के पास केवल विलंबकारी शक्ति है।
Article 198धन विधेयकों की विशेष प्रक्रिया
धन विधेयक केवल विधानसभा में पेश होंगे।
Article 199धन विधेयक की परिभाषा
राज्य के स्तर पर कर और व्यय से संबंधित विधेयकों की परिभाषा।
Article 200विधेयकों पर अनुमति
राज्यपाल विधेयक को अनुमति देगा, रोक सकता है या राष्ट्रपति के विचार के लिए सुरक्षित रख सकता है।

विधेयक और बजट (201-212)

Article 201विचार के लिए आरक्षित विधेयक
जब राज्यपाल किसी विधेयक को राष्ट्रपति के विचार के लिए सुरक्षित रखता है।
Article 202वार्षिक वित्तीय विवरण (State Budget)
राज्य सरकार का वार्षिक आय-व्यय का लेखा-जोखा विधानमंडल में पेश करना।
Article 203प्राकलनों के संबंध में प्रक्रिया
राज्य विधानसभा में अनुदान की मांगों पर चर्चा और मतदान।
Article 204विनियोग विधेयक (Appropriation Bill)
राज्य की संचित निधि से धन निकालने के लिए कानूनी मंजूरी।
Article 205अनुपूरक, अतिरिक्त या अधिक अनुदान
बजट कम पड़ने पर अतिरिक्त धनराशि की मांग करना।
Article 206लेखानुदान और अपवादानुदान
विशेष परिस्थितियों में बजट से पहले अग्रिम भुगतान की शक्ति।
Article 207वित्त विधेयकों के बारे में विशेष उपबंध
वित्तीय मामलों से संबंधित विधेयकों को पेश करने के नियम।
Article 208प्रक्रिया के नियम
राज्य विधानमंडल के सदन अपनी कार्यवाही के लिए नियम बना सकते हैं।
Article 209वित्तीय कार्य का विनियमन
राज्य में वित्तीय कार्यों को समय पर पूरा करने के लिए विधानमंडल की विधि।
Article 210विधानमंडल में प्रयोग की जाने वाली भाषा
कार्यवाही राज्य की राजभाषा, हिंदी या अंग्रेजी में होगी।
Article 211चर्चा पर निर्बंधन
सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के जजों के आचरण पर विधानमंडल में चर्चा नहीं होगी।
Article 212न्यायालयों द्वारा जांच न किया जाना
विधानमंडल की कार्यवाही की वैधता को किसी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जाएगी।

अध्यादेश शक्ति (213)

Article 213राज्यपाल की अध्यादेश जारी करने की शक्ति
विधानमंडल का सत्र न होने पर राज्यपाल को कानून (अध्यादेश) बनाने की शक्ति।

उच्च न्यायालय (Art 214-232)

Article 214राज्यों के लिए उच्च न्यायालय
प्रत्येक राज्य के लिए एक उच्च न्यायालय (High Court) होगा।
Article 215अभिलेख न्यायालय
उच्च न्यायालय का 'कोर्ट ऑफ रिकॉर्ड' होना और अवमानना पर दंड देने की शक्ति।
Article 216उच्च न्यायालयों का गठन
हाई कोर्ट एक मुख्य न्यायाधीश और अन्य न्यायाधीशों से मिलकर बनेगा।
Article 217न्यायाधीशों की नियुक्ति और शर्तें
राष्ट्रपति द्वारा जजों की नियुक्ति और उनके पद की योग्यताएं।
Article 218सुप्रीम कोर्ट के उपबंधों का लागू होना
जजों को हटाने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के नियम हाई कोर्ट पर भी लागू होंगे।
Article 219शपथ या प्रतिज्ञान
हाई कोर्ट के जजों को राज्यपाल या उसके द्वारा नियुक्त व्यक्ति शपथ दिलाएगा।
Article 220वकालत पर निर्बंधन
स्थायी जज होने के बाद उस न्यायालय में वकालत करने पर रोक।
Article 221न्यायाधीशों के वेतन
हाई कोर्ट के जजों के वेतन और भत्तों का निर्धारण।
Article 222न्यायाधीशों का स्थानांतरण (Transfer)
एक हाई कोर्ट से दूसरे हाई कोर्ट में जजों का तबादला।
Article 223कार्यकारी मुख्य न्यायमूर्ति
मुख्य न्यायाधीश की अनुपस्थिति में कार्यकारी जज की नियुक्ति।
Article 224अपर और कार्यकारी न्यायाधीश
कार्यभार बढ़ने पर अतिरिक्त जजों की नियुक्ति।
Article 224Aरिटायर्ड जजों की नियुक्ति
हाई कोर्ट की बैठकों में रिटायर्ड जजों को बुलाना।
Article 225विद्यमान उच्च न्यायालयों की अधिकारिता
हाई कोर्ट की शक्तियों और क्षेत्राधिकार का विवरण।
Article 226रिट (Writ) जारी करने की शक्ति
मूल अधिकारों और अन्य कार्यों के लिए हाई कोर्ट द्वारा रिट जारी करना।
Article 227अधीक्षण की शक्ति
अपने अधिकार क्षेत्र के सभी न्यायालयों पर हाई कोर्ट का नियंत्रण।
Article 228मामलों का अंतरण
निचली अदालतों से संवैधानिक मामलों को अपने पास मंगाने की शक्ति।
Article 229अधिकारी और सेवक
हाई कोर्ट के कर्मचारियों की नियुक्ति और खर्च।
Article 230UTs पर विस्तार
हाई कोर्ट के क्षेत्राधिकार का केंद्र शासित प्रदेशों पर विस्तार।
Article 231साझा उच्च न्यायालय
दो या दो से अधिक राज्यों के लिए एक ही हाई कोर्ट की स्थापना।

अधीनस्थ न्यायालय (Art 233-237)

Article 233जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति
राज्यपाल द्वारा हाई कोर्ट की सलाह पर जिला जजों की नियुक्ति।
Article 234न्यायिक सेवा में भर्ती
जिला जजों के अलावा अन्य न्यायिक पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया।
Article 235अधीनस्थ न्यायालयों पर नियंत्रण
निचली अदालतों पर हाई कोर्ट का प्रशासनिक नियंत्रण।
Article 236व्याख्या
जिला न्यायाधीश और न्यायिक सेवा शब्दों की परिभाषा।
Article 237मजिस्ट्रेटों पर लागू होना
राज्यपाल द्वारा इस अध्याय के प्रावधानों को मजिस्ट्रेटों पर लागू करना।
भाग 8: संघ राज्य क्षेत्र (Union Territories)

UTs का प्रशासन

Article 239संघ राज्य क्षेत्रों का प्रशासन
UTs का प्रशासन राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त प्रशासक (Administrator/LG) के माध्यम से चलाया जाएगा।
Article 239Aस्थानीय विधानमंडलों/मंत्रिपरिषदों का सृजन
संसद कुछ UTs (जैसे पुडुचेरी) के लिए कानून द्वारा विधानमंडल या मंत्रिपरिषद बना सकती है।
Article 239AAदिल्ली के संबंध में विशेष उपबंध
दिल्ली को 'राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र' (NCT) का दर्जा और वहां विधानसभा व मंत्रिपरिषद की विशेष व्यवस्था।
Article 239ABसंवैधानिक तंत्र विफल होने पर प्रावधान
दिल्ली में संवैधानिक मशीनरी फेल होने पर राष्ट्रपति शासन संबंधी नियम।
Article 239Bप्रशासक की अध्यादेश शक्ति
विधानमंडल के अवकाश के दौरान प्रशासक (LG) द्वारा अध्यादेश जारी करने की शक्ति।
Article 240विनियम बनाने की राष्ट्रपति की शक्ति
अंडमान, लक्षद्वीप, दादरा-नगर हवेली आदि के लिए शांति और प्रगति के हेतु राष्ट्रपति नियम बना सकता है।
Article 241UTs के लिए उच्च न्यायालय
संसद किसी UT के लिए अलग हाई कोर्ट बना सकती है या उसे किसी राज्य के हाई कोर्ट से जोड़ सकती है।
Article 242[निरसित/Repealed]
कुर्ग (Coorg) से संबंधित यह अनुच्छेद 7वें संविधान संशोधन (1956) द्वारा हटा दिया गया है।

भाग 9: पंचायतें (Art 243 - 243-O)

Article 243परिभाषाएं
ग्राम, सभा, पंचायत और क्षेत्र से संबंधित परिभाषाएं।
Article 243Aग्राम सभा
ग्राम स्तर पर ग्राम सभा की शक्तियों और कार्यों का निर्धारण।
Article 243Bपंचायतों का गठन
त्रि-स्तरीय पंचायती राज प्रणाली (ग्राम, मध्यवर्ती और जिला स्तर)।
Article 243Cपंचायतों की संरचना
पंचायतों के सदस्यों और अध्यक्षों के चुनाव का तरीका।
Article 243Dस्थानों का आरक्षण
SC, ST और महिलाओं (न्यूनतम 1/3) के लिए सीटों का आरक्षण।
Article 243Eपंचायतों की अवधि
पंचायतों का कार्यकाल 5 वर्ष होगा।
Article 243Fसदस्यता के लिए अयोग्यताएं
किन कारणों से कोई व्यक्ति पंचायत सदस्य बनने के अयोग्य होगा।
Article 243Gशक्तियां, प्राधिकार और उत्तरदायित्व
पंचायतों को आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए शक्तियां देना (11वीं अनुसूची)।
Article 243Hकर लगाने की शक्तियां
पंचायतों द्वारा टैक्स वसूलने और निधियों के उपयोग की शक्ति।
Article 243Iराज्य वित्त आयोग का गठन
पंचायतों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा के लिए राज्यपाल द्वारा आयोग का गठन।
Article 243Jखातों की संपरीक्षा (Audit)
पंचायतों के खातों की जांच का प्रावधान।
Article 243Kपंचायतों के लिए निर्वाचन
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव का संचालन।
Article 243LUTs पर लागू होना
केंद्र शासित प्रदेशों में पंचायतों के नियमों का विस्तार।
Article 243Mकुछ क्षेत्रों पर लागू न होना
नागालैंड, मेघालय, मिजोरम जैसे क्षेत्रों में विशेष छूट।
Article 243Nविद्यमान विधियों का जारी रहना
पुराने कानूनों का नई पंचायत व्यवस्था के साथ तालमेल।
Article 243-Oनिर्वाचन मामलों में न्यायालय के हस्तक्षेप पर रोक
चुनावी परिसीमन जैसे मामलों में न्यायालय हस्तक्षेप नहीं करेगा।

भाग 9A: नगरपालिकाएं (Art 243P - 243ZG)

Article 243P - 243Rपरिभाषा, गठन और संरचना
नगर पंचायत, नगर परिषद और नगर निगम का वर्गीकरण और गठन।
Article 243Sवार्ड समितियों का गठन
नगर पालिकाओं के भीतर वार्ड स्तर की समितियों का प्रावधान।
Article 243T - 243Uआरक्षण और कार्यकाल
सीटों का आरक्षण और 5 वर्ष की अवधि का नियम।
Article 243Wशक्तियां और उत्तरदायित्व
शहरी विकास और नागरिक सुविधाओं के लिए 18 विषयों पर कार्य (12वीं अनुसूची)।
Article 243Y - 243ZAवित्त आयोग और निर्वाचन
नगर पालिकाओं के लिए बजट समीक्षा और चुनाव प्रक्रिया।
Article 243ZDजिला योजना समिति
पूरे जिले के लिए विकास योजनाओं का समन्वय करना।
Article 243ZEमहानगर योजना समिति
महानगरीय क्षेत्रों के लिए विशेष योजना विकास।
Article 243ZGन्यायालय के हस्तक्षेप पर रोक
नगरपालिका चुनावी मामलों में अदालती दखल पर पाबंदी।

भाग 10: अनुसूचित क्षेत्र (Art 244-244A)

Article 244अनुसूचित और जनजातीय क्षेत्रों का प्रशासन
5वीं और 6वीं अनुसूची के तहत विशेष क्षेत्रों के प्रशासन का नियम।
Article 244Aअसम में स्वायत्त राज्य का गठन
असम के जनजातीय क्षेत्रों के लिए अलग स्वायत्त राज्य बनाने की शक्ति।

भाग 11: केंद्र-राज्य संबंध (Art 245-263)

Article 245विधियों का विस्तार
संसद पूरे देश के लिए और विधानमंडल राज्य के लिए कानून बना सकते हैं।
Article 246विषय सूची (Lists)
संघ, राज्य और समवर्ती सूची (7वीं अनुसूची) के विषयों का बंटवारा।
Article 248अवशिष्ट शक्तियां (Residuary Powers)
जिन विषयों का जिक्र किसी सूची में नहीं है, उन पर कानून केवल संसद बनाएगी।
Article 249राज्य सूची पर संसद की शक्ति
राष्ट्रीय हित में राज्यसभा के प्रस्ताव पर संसद राज्य सूची के विषय पर कानून बना सकती है।
Article 250आपातकाल में विधायी शक्ति
आपातकाल के दौरान संसद राज्य सूची के किसी भी विषय पर कानून बना सकती है।
Article 253अंतरराष्ट्रीय समझौतों को प्रभावी बनाना
किसी अंतरराष्ट्रीय संधि को लागू करने के लिए संसद पूरे देश हेतु कानून बना सकती है।
Article 254कानूनों में विसंगति (Repugnancy)
केंद्र और राज्य के कानून में टकराव होने पर केंद्र का कानून मान्य होगा।
Article 256-257राज्यों को केंद्र के निर्देश
प्रशासनिक मामलों में केंद्र सरकार राज्यों को निर्देश दे सकती है।
Article 262नदी जल विवाद
अंतरराज्यीय नदियों के पानी के बंटवारे संबंधी विवादों का निपटारा।
Article 263अंतरराज्यीय परिषद (Inter-State Council)
राज्यों के बीच समन्वय के लिए राष्ट्रपति द्वारा परिषद की स्थापना।
भाग 12: वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद (पूर्ण विवरण)

वित्त: सामान्य और करों का वितरण (264-281)

Article 264व्याख्या
इस अध्याय में प्रयुक्त वित्तीय शब्दावलियों की व्याख्या।
Article 265विधि के प्राधिकार के बिना कर न लगाया जाना
कोई भी टैक्स केवल कानून बनाकर ही लगाया जा सकता है, कार्यपालिका के आदेश से नहीं।
Article 266भारत और राज्यों की संचित निधियाँ और लोक लेखे
सरकार की सभी प्राप्तियां और खर्च 'संचित निधि' (Consolidated Fund) से होते हैं।
Article 267आकस्मिकता निधि (Contingency Fund)
अनपेक्षित खर्चों के लिए राष्ट्रपति या राज्यपाल के पास जमा विशेष निधि।
Article 268संघ द्वारा लगाए गए, राज्यों द्वारा संगृहीत कर
जैसे स्टाम्प शुल्क—लगाती केंद्र है, पर वसूलती और रखती राज्य सरकारें हैं।
Article 269अंतरराज्यीय व्यापार पर कर
माल के खरीद-बिक्री पर कर जो केंद्र लगाता है पर राज्यों को सौंप देता है।
Article 269AGST (IGST) का उगाही और विभाजन
अंतरराज्यीय व्यापार में GST का पैसा केंद्र और राज्यों के बीच कैसे बंटेगा।
Article 270संगृहीत कर और संघ-राज्यों के बीच वितरण
आयकर जैसे टैक्स जो केंद्र और राज्यों के बीच एक तय अनुपात में बंटते हैं।
Article 271कुछ शुल्कों और करों पर अधिभार (Surcharge)
केंद्र सरकार विशेष उद्देश्यों के लिए टैक्स पर एक्स्ट्रा टैक्स लगा सकती है जो केवल केंद्र का होगा।
Article 272[निरसित]
इसे 80वें संशोधन द्वारा हटा दिया गया है।
Article 273जूट और जूट उत्पादों पर निर्यात शुल्क के बदले अनुदान
जूट उगाने वाले राज्यों (जैसे बंगाल, असम) को विशेष वित्तीय सहायता।
Article 274कराधान वाले विधेयकों पर राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश
राज्यों के हित वाले टैक्स बिल पेश करने से पहले राष्ट्रपति की मंजूरी अनिवार्य है।
Article 275राज्यों को सहायता अनुदान
जरूरतमंद राज्यों को केंद्र द्वारा दी जाने वाली वित्तीय मदद (Grants-in-aid)।
Article 276वृत्तियों, व्यापारों पर कर (Professional Tax)
राज्य सरकारें नौकरी या व्यापार करने वालों पर टैक्स लगा सकती हैं (सीमित राशि)।
Article 277व्यावृत्ति (Savings)
संविधान लागू होने से पहले के कुछ टैक्सों का जारी रहना।
Article 278[निरसित]
7वें संशोधन द्वारा हटाया गया।
Article 279शुद्ध आगम (Net Proceeds) की गणना
टैक्स की शुद्ध कमाई कैसे गिनी जाएगी, जिसे CAG प्रमाणित करेगा।
Article 279AGST परिषद (GST Council)
GST दरों और नियमों के लिए केंद्र-राज्य की संयुक्त परिषद।
Article 280वित्त आयोग (Finance Commission)
राजस्व बंटवारे के लिए हर 5 साल में गठित होने वाला संवैधानिक निकाय।
Article 281वित्त आयोग की सिफारिशें
आयोग की रिपोर्ट राष्ट्रपति संसद के दोनों सदनों में रखवाएगा।

विविध वित्तीय प्रावधान (282-291)

Article 282संघ या राज्य द्वारा लोक प्रयोजन के लिए व्यय
केंद्र या राज्य लोक हित में अपनी शक्ति से बाहर भी खर्च कर सकते हैं।
Article 283संचित निधियों और आकस्मिकता निधियों की अभिरक्षा
इन निधियों में पैसा जमा करने और निकालने के नियम।
Article 284लोक सेवकों और न्यायालयों के पास जमा राशि
अदालतों या सरकारी अफसरों के पास जमा धन लोक लेखे (Public Account) में जाएगा।
Article 285संघ की संपत्ति को राज्य कराधान से छूट
केंद्र सरकार की बिल्डिंग/संपत्ति पर राज्य टैक्स नहीं लगा सकते।
Article 286माल के विक्रय पर टैक्स पर निर्बंधन
राज्य सरकारें राज्य के बाहर होने वाली खरीद-बिक्री पर टैक्स नहीं लगा सकतीं।
Article 287-288बिजली और पानी पर टैक्स से छूट
रेलवे या केंद्र की बिजली और अंतरराज्यीय जल बोर्डों पर टैक्स की सीमाएं।
Article 289राज्यों की संपत्ति और आय को संघ के कर से छूट
राज्यों की सरकारी आय पर केंद्र इनकम टैक्स नहीं लगाएगा।
Article 290कुछ खर्चों और पेंशनों के संबंध में समायोजन
केंद्र और राज्यों के बीच साझा पेंशन और खर्चों का तालमेल।
Article 291[निरसित]
प्रिवी पर्स (राजाओं के भत्ते) से संबंधित, जिसे 26वें संशोधन द्वारा हटाया गया।

ऋण लेना (Borrowing - 292-293)

Article 292भारत सरकार द्वारा उधार लेना
केंद्र सरकार भारत की संचित निधि की साख पर कर्ज ले सकती है।
Article 293राज्यों द्वारा उधार लेना
राज्य केवल देश के अंदर से ही कर्ज ले सकते हैं; बाहरी कर्ज के लिए केंद्र की अनुमति चाहिए।

संपत्ति, संविदाएं और वाद (294-300)

Article 294-295संपत्ति और देनदारियों का उत्तराधिकार
ब्रिटिश काल और रियासतों की संपत्ति का केंद्र-राज्यों में ट्रांसफर।
Article 296राजगामी (Escheat) संपत्ति
लावारिस संपत्ति का सरकार के पास जाना।
Article 297समुद्री जलक्षेत्र की बहुमूल्य वस्तुएं
Exclusive Economic Zone (EEZ) के सभी संसाधन संघ (केंद्र) के होंगे।
Article 298व्यापार करने की शक्ति
सरकार को जमीन खरीदने, बेचने और बिजनेस करने का पूरा अधिकार है।
Article 299संविदाएं (Contracts)
सरकारी एग्रीमेंट राष्ट्रपति (केंद्र) या राज्यपाल (राज्य) के नाम पर ही होंगे।
Article 300वाद और कार्यवाहियां
सरकार पर किस नाम से मुकदमा होगा ('भारत संघ' या 'राज्य का नाम')।

संपत्ति का अधिकार (Legal Right)

Article 300Aसंपत्ति का अधिकार
किसी भी व्यक्ति को उसकी संपत्ति से कानून के बिना वंचित नहीं किया जाएगा। (44वें संशोधन 1978 द्वारा फंडामेंटल राइट से कानूनी अधिकार बनाया गया)।
भाग 13: व्यापार, वाणिज्य और समागम (Art 301-307)
Article 301व्यापार, वाणिज्य और समागम की स्वतंत्रता
पूरे भारत में कहीं भी व्यापार और आवागमन पूरी तरह स्वतंत्र होगा।
Article 302संसद की शक्ति
संसद लोक हित में व्यापार की स्वतंत्रता पर उचित प्रतिबंध लगा सकती है।
Article 303विधायी शक्तियों पर निर्बंधन
संसद या राज्य विधानमंडल व्यापार के मामले में एक राज्य को दूसरे पर प्राथमिकता नहीं देंगे।
Article 304राज्यों के बीच व्यापार पर प्रतिबंध
राज्य सरकारें दूसरे राज्यों से आने वाले माल पर वैसा ही टैक्स लगा सकती हैं जैसा अपने राज्य के माल पर।
Article 305विद्यमान विधियों का संरक्षण
पुराने कानूनों और सरकारी एकाधिकार (Monopoly) वाले नियमों को सुरक्षा।
Article 306[निरसित]
इसे 7वें संविधान संशोधन द्वारा हटा दिया गया है।
Article 307प्राधिकारी की नियुक्ति
अनुच्छेद 301-304 के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए संसद द्वारा अधिकारी की नियुक्ति।
भाग 14: संघ और राज्यों के अधीन सेवाएँ (Art 308-323)

अध्याय 1: सेवाएं (Services)

Article 308व्याख्या
इस भाग में "राज्य" शब्द के अर्थ का स्पष्टीकरण।
Article 309भर्ती और सेवा की शर्तें
सरकारी कर्मचारियों की भर्ती और उनकी सेवा की शर्तें संसद या विधानमंडल तय करेंगे।
Article 310पदावधि (Doctrine of Pleasure)
संघ के कर्मचारी राष्ट्रपति के और राज्य के कर्मचारी राज्यपाल के प्रसादपर्यंत पद धारण करेंगे।
Article 311सिविल सेवकों को सुरक्षा
किसी कर्मचारी को उसकी नियुक्ति करने वाले अधिकारी से नीचे के अधिकारी द्वारा बर्खास्त नहीं किया जाएगा।
Article 312अखिल भारतीय सेवाएँ (All India Services)
राज्यसभा के प्रस्ताव पर संसद नई अखिल भारतीय सेवाएं (जैसे IAS, IPS, IFS) बना सकती है।
Article 312Aसेवा शर्तों में परिवर्तन की शक्ति
संसद को कुछ विशेष अधिकारियों की सेवा शर्तों को बदलने का अधिकार है।
Article 313संक्रमणकालीन उपबंध
संविधान लागू होने से पहले के नियमों का तब तक जारी रहना जब तक नए नियम न बनें।
Article 314[निरसित]
इसे 28वें संशोधन द्वारा हटाया गया।

अध्याय 2: लोक सेवा आयोग (Public Service Commissions)

Article 315UPSC और SPSC का गठन
संघ के लिए एक लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्यों के लिए राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) होगा।
Article 316सदस्यों की नियुक्ति और पदावधि
नियुक्ति राष्ट्रपति (UPSC) या राज्यपाल (SPSC) करेंगे। कार्यकाल 6 वर्ष या उम्र की सीमा (65/62 वर्ष) तक।
Article 317सदस्यों को हटाना या निलंबित करना
दुर्व्यवहार के आधार पर राष्ट्रपति द्वारा (सुप्रीम कोर्ट की जांच के बाद) हटाने की प्रक्रिया।
Article 318नियम बनाने की शक्ति
आयोग के सदस्यों और कर्मचारियों की सेवा शर्तों के लिए नियम बनाने का अधिकार।
Article 319पद समाप्ति के बाद रोक
आयोग के सदस्य रिटायरमेंट के बाद भारत सरकार या राज्य सरकार के अधीन किसी और नौकरी के पात्र नहीं होंगे।
Article 320लोक सेवा आयोगों के कार्य
परीक्षाएं आयोजित करना और सिविल सेवाओं में नियुक्ति व पदोन्नति पर सलाह देना।
Article 321कार्यों के विस्तार की शक्ति
संसद या विधानमंडल कानून बनाकर आयोग के कार्यों का दायरा बढ़ा सकते हैं।
Article 322लोक सेवा आयोगों के व्यय
UPSC का खर्च भारत की संचित निधि पर और SPSC का राज्य की संचित निधि पर भारित होगा।
Article 323लोक सेवा आयोगों के प्रतिवेदन (Reports)
आयोग अपनी वार्षिक रिपोर्ट राष्ट्रपति या राज्यपाल को सौंपेगा, जिसे सदन के सामने रखा जाएगा।
भाग 14A: अधिकरण (Tribunals) (Art 323A-323B)
Article 323Aप्रशासकीय अधिकरण (Administrative Tribunals)
लोक सेवकों (Government Employees) की सेवा शर्तों और विवादों के निपटारे के लिए संसद द्वारा CAT (Central Administrative Tribunal) जैसे अधिकरणों की स्थापना।
Article 323Bअन्य विषयों के लिए अधिकरण
टैक्स, विदेशी मुद्रा, श्रम विवाद और भूमि सुधार जैसे अन्य विशिष्ट विषयों के लिए ट्रिब्यूनल बनाने की शक्ति।
भाग 15: निर्वाचन (Elections) (Art 324-329A)
Article 324निर्वाचन आयोग (Election Commission)
चुनावों का अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण एक स्वतंत्र 'निर्वाचन आयोग' में निहित होगा।
Article 325धर्म, मूलवंश, जाति या लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं
किसी भी व्यक्ति को इन आधारों पर मतदाता सूची (Voter List) से बाहर नहीं रखा जाएगा।
Article 326वयस्क मताधिकार (Universal Adult Suffrage)
लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव वयस्क मताधिकार (18 वर्ष की आयु) के आधार पर होंगे।
Article 327चुनावों के संबंध में संसद की शक्ति
निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन और मतदाता सूची के लिए कानून बनाने की संसद की शक्ति।
Article 328राज्यों के विधानमंडल की शक्ति
जहां संसद ने कानून नहीं बनाया है, वहां राज्य विधानमंडल अपने चुनावों के लिए नियम बना सकता है।
Article 329निर्वाचन मामलों में न्यायालयों के हस्तक्षेप पर रोक
परिसीमन और सीटों के आवंटन जैसे चुनावी कानूनों को अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती।
Article 329A[निरसित/Repealed]
प्रधानमंत्री और अध्यक्ष के चुनाव के संबंध में विशेष प्रावधान (44वें संशोधन द्वारा हटाया गया)।
भाग 16: कुछ वर्गों के संबंध में विशेष उपबंध (Art 330-342B)

विधायिका में आरक्षण (330-334)

Article 330लोकसभा में SC और ST के लिए सीटों का आरक्षण
जनसंख्या के अनुपात में लोकसभा में अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लिए सीटें आरक्षित होंगी।
Article 331लोकसभा में आंग्ल-भारतीय (Anglo-Indians) का प्रतिनिधित्व
राष्ट्रपति 2 सदस्यों को नामित कर सकता था (नोट: 104वें संशोधन द्वारा इसे अब आगे नहीं बढ़ाया गया है)।
Article 332विधानसभाओं में SC और ST के लिए आरक्षण
राज्यों की विधानसभाओं में अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लिए आरक्षित सीटें।
Article 333विधानसभाओं में आंग्ल-भारतीयों का प्रतिनिधित्व
राज्यपाल 1 सदस्य को नामित कर सकता था (अब निष्प्रभावी)।
Article 334आरक्षण की अवधि
सीटों के आरक्षण और नामांकन की समय सीमा (हर 10 साल बाद इसे बढ़ाया जाता है)।

सेवाएं और विशेष आयोग (335-342B)

Article 335सेवाओं और पदों के लिए दावे
प्रशासन की दक्षता बनाए रखते हुए नियुक्तियों में SC/ST के दावों पर विचार करना।
Article 336-337आंग्ल-भारतीयों के लिए विशेष रियायतें
कुछ सेवाओं और शैक्षिक अनुदानों में आंग्ल-भारतीय समुदाय को मिलने वाली पुरानी सुविधाएं।
Article 338राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC)
अनुसूचित जातियों के हितों की रक्षा के लिए एक स्वतंत्र संवैधानिक आयोग।
Article 338Aराष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST)
89वें संशोधन द्वारा अनुसूचित जनजातियों के लिए अलग आयोग का गठन।
Article 338Bराष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC)
102वें संशोधन (2018) द्वारा पिछड़े वर्गों के लिए संवैधानिक आयोग का गठन।
Article 339अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन पर संघ का नियंत्रण
अनुसूचित क्षेत्रों और ST के कल्याण पर केंद्र सरकार की रिपोर्ट और नियंत्रण।
Article 340पिछड़ा वर्ग आयोग की नियुक्ति
पिछड़े वर्गों की स्थितियों की जांच के लिए राष्ट्रपति द्वारा आयोग की नियुक्ति (जैसे मंडल आयोग)।
Article 341अनुसूचित जातियां (Scheduled Castes)
राष्ट्रपति द्वारा किसी जाति को SC सूची में शामिल करने की अधिसूचना।
Article 342अनुसूचित जनजातियां (Scheduled Tribes)
राष्ट्रपति द्वारा किसी जनजाति को ST सूची में शामिल करने का प्रावधान।
Article 342Aसामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़ा वर्ग
OBC सूची की पहचान और उसे अधिसूचित करने की प्रक्रिया।
भाग 17: राजभाषा (Official Language) (Art 343-351)

संघ की भाषा (343-344)

Article 343संघ की राजभाषा
संघ की राजभाषा 'हिंदी' और लिपि 'देवनागरी' होगी। अंकों का रूप भारतीय अंकों का अंतरराष्ट्रीय रूप होगा।
Article 344राजभाषा के संबंध में आयोग और समिति
राष्ट्रपति द्वारा राजभाषा आयोग का गठन और संसदीय समिति द्वारा उसकी समीक्षा।

प्रादेशिक भाषाएं (345-347)

Article 345राज्य की राजभाषा/भाषाएं
राज्य का विधानमंडल उस राज्य में प्रयोग होने वाली एक या अधिक भाषाओं या हिंदी को राजभाषा के रूप में अपना सकता है।
Article 346पत्रादि की राजभाषा
एक राज्य और दूसरे राज्य के बीच या संघ और राज्य के बीच पत्राचार की भाषा (Communication Language)।
Article 347किसी राज्य की जनसंख्या के अनुभाग द्वारा बोली जाने वाली भाषा
यदि किसी राज्य की जनसंख्या का पर्याप्त भाग चाहता है, तो राष्ट्रपति उस भाषा को भी वहां आधिकारिक मान्यता दे सकता है।

न्यायालयों की भाषा (348-349)

Article 348SC, HC और विधेयकों की भाषा
जब तक संसद अन्यथा कानून न बनाए, सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट की कार्यवाही 'अंग्रेजी' में होगी।
Article 349भाषा संबंधी विधियों के लिए विशेष प्रक्रिया
राजभाषा से संबंधित कोई भी विधेयक राष्ट्रपति की पूर्व मंजूरी के बिना पेश नहीं किया जाएगा।

विशेष निर्देश (350-351)

Article 350शिकायत निवारण की भाषा
प्रत्येक व्यक्ति किसी भी सरकारी अधिकारी को अपनी शिकायत संघ या राज्य में प्रयोग होने वाली किसी भी भाषा में दे सकता है।
Article 350Aप्राथमिक स्तर पर मातृभाषा में शिक्षा
भाषाई अल्पसंख्यक समूहों के बच्चों को शिक्षा के प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा में शिक्षा देने की सुविधा।
Article 350Bभाषाई अल्पसंख्यकों के लिए विशेष अधिकारी
भाषाई अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा के लिए राष्ट्रपति द्वारा विशेष अधिकारी की नियुक्ति।
Article 351हिंदी भाषा के विकास के लिए निर्देश
संघ का यह कर्तव्य होगा कि वह हिंदी भाषा का प्रसार बढ़ाए और उसका विकास करे।
भाग 18: आपात उपबंध (Emergency Provisions) (Art 352-360)

राष्ट्रीय आपातकाल (Art 352-355)

Article 352आपात की उद्घोषणा (National Emergency)
युद्ध, बाह्य आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह के आधार पर राष्ट्रपति द्वारा पूरे देश या उसके किसी हिस्से में आपातकाल की घोषणा।
Article 353आपात की उद्घोषणा के प्रभाव
जब 352 लागू हो, तो केंद्र की शक्ति का विस्तार राज्यों तक हो जाता है (कार्यपालिका और विधायी नियंत्रण)।
Article 354राजस्व के वितरण संबंधी प्रावधानों का लागू होना
आपातकाल के दौरान केंद्र और राज्यों के बीच धन के बंटवारे के नियमों में बदलाव करने की शक्ति।
Article 355बाह्य आक्रमण से राज्यों की रक्षा का संघ का कर्तव्य
यह केंद्र की जिम्मेदारी है कि वह हर राज्य की बाहरी हमले और आंतरिक अशांति से रक्षा करे।

राष्ट्रपति शासन (Art 356-357)

Article 356राज्यों में संवैधानिक तंत्र विफल होना (President's Rule)
यदि किसी राज्य की सरकार संविधान के अनुसार नहीं चल रही, तो राष्ट्रपति वहां शासन अपने हाथ में ले सकता है।
Article 357विधायी शक्तियों का प्रयोग
अनुच्छेद 356 के तहत राज्य की कानून बनाने की शक्ति संसद के पास चली जाती है।

अधिकारों का स्थगन (Art 358-359)

Article 358अनुच्छेद 19 का स्थगन
आपातकाल लगते ही आर्टिकल 19 की स्वतंत्रताएं स्वतः ही निलंबित हो जाती हैं।
Article 359अन्य मौलिक अधिकारों का स्थगन
राष्ट्रपति आदेश द्वारा अन्य अधिकारों को रोक सकता है (लेकिन आर्टिकल 20 और 21 को कभी निलंबित नहीं किया जा सकता)।

वित्तीय आपातकाल (Art 360)

Article 360वित्तीय आपातकाल (Financial Emergency)
यदि भारत की वित्तीय स्थिरता को खतरा हो, तो राष्ट्रपति इसे लागू कर सकता है। (भारत में अब तक एक बार भी लागू नहीं हुआ)।
भाग 19: प्रकीर्ण (Miscellaneous) (Art 361-367)
Article 361राष्ट्रपति और राज्यपालों का संरक्षण
राष्ट्रपति या राज्यपाल अपने पद की शक्तियों के प्रयोग के लिए किसी न्यायालय के प्रति उत्तरदायी नहीं होंगे। उनके कार्यकाल के दौरान उन पर कोई आपराधिक कार्यवाही नहीं की जा सकती।
Article 361Aसंसद और विधानमंडलों की कार्यवाहियों के प्रकाशन का संरक्षण
सदन की सच्ची कार्यवाही को अखबार या रेडियो में प्रकाशित करने पर किसी व्यक्ति पर मुकदमा नहीं चलेगा।
Article 361Bलाभप्रद राजनीतिक पद पर नियुक्ति के लिए अयोग्यता
दलबदल के आधार पर अयोग्य घोषित सदस्य को किसी लाभ के राजनीतिक पद पर नियुक्त नहीं किया जाएगा।
Article 362[निरसित/Repealed]
देशी राज्यों के शासकों के अधिकार और विशेषाधिकार (अब हटा दिया गया है)।
Article 363संधियों, समझौतों आदि से उत्पन्न विवादों में न्यायालयों पर रोक
रियासतों के साथ की गई पुरानी संधियों से जुड़े विवादों में न्यायालय हस्तक्षेप नहीं करेंगे।
Article 363Aदेशी राज्यों के शासकों को दी गई मान्यता की समाप्ति
महाराजाओं की मान्यता और उनके 'प्रिवी पर्स' (भत्ते) को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया।
Article 364महापत्तन (Major Ports) और विमानक्षेत्रों के बारे में विशेष उपबंध
राष्ट्रपति बंदरगाहों और हवाई अड्डों के लिए विशेष नियम लागू या रद्द कर सकता है।
Article 365संघ के निर्देशों का पालन करने में विफलता का प्रभाव
यदि राज्य केंद्र के निर्देशों का पालन नहीं करता, तो राष्ट्रपति यह मान सकता है कि वहां संवैधानिक तंत्र विफल हो गया है (इसके बाद Art 356 लगाया जा सकता है)।
Article 366परिभाषाएं
संविधान में प्रयुक्त विभिन्न शब्दों जैसे 'कृषि आय', 'माल', 'ऋण' आदि की परिभाषा।
Article 367व्याख्या (Interpretation)
संविधान की व्याख्या के लिए जनरल क्लॉजेज एक्ट, 1897 के नियमों का प्रयोग।
भाग 20: संविधान का संशोधन (Art 368)
Article 368संविधान का संशोधन करने की संसद की शक्ति
संसद संविधान के किसी भी भाग को संशोधित कर सकती है। इसके दो मुख्य तरीके दिए गए हैं:
  • 1. संसद का विशेष बहुमत (2/3 सदस्य)।
  • 2. विशेष बहुमत + आधे राज्यों का समर्थन (संघीय ढांचे के लिए)।
(सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, संसद 'मूल ढांचे' - Basic Structure को नहीं बदल सकती।)
भाग 21: अस्थाई, संक्रमणकालीन और विशेष उपबंध (Art 369-392)
Article 369राज्य सूची के कुछ विषयों पर संसद की अस्थाई शक्ति
शुरुआत के 5 वर्षों के लिए संसद को राज्य सूची के कुछ विषयों पर कानून बनाने की शक्ति दी गई थी।
Article 370जम्मू-कश्मीर के संबंध में अस्थाई उपबंध
जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा (अब अगस्त 2019 से इसके मुख्य प्रावधान निष्प्रभावी कर दिए गए हैं)।
Article 371 se 371-Jविभिन्न राज्यों के लिए विशेष प्रावधान
Alag-alag states ke liye vishesh niyam:
  • 371: महाराष्ट्र और गुजरात
  • 371A: नागालैंड
  • 371B: असम
  • 371C: मणिपुर
  • 371D & E: आंध्र प्रदेश और तेलंगाना
  • 371F: सिक्किम
  • 371G: मिजोरम
  • 371H: अरुणाचल प्रदेश
  • 371-I: गोवा
  • 371-J: कर्नाटक (हैदराबाद-कर्नाटक क्षेत्र)
Article 372-373विद्यमान विधियों का जारी रहना
संविधान लागू होने से पहले के कानूनों का तब तक बने रहना जब तक उन्हें बदला न जाए।
Article 374-378न्यायालयों और अधिकारियों के बारे में प्रावधान
Federal Court के जजों का Supreme Court में ट्रांसफर और UPSC/CAG जैसे पदों के बारे में संक्रमणकालीन नियम।
Article 392कठिनाइयों को दूर करने की राष्ट्रपति की शक्ति
संविधान के लागू होने के समय आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए राष्ट्रपति को आदेश देने की शक्ति।
भाग 22: संक्षिप्त नाम, प्रारंभ, हिंदी में प्राधिकृत पाठ (Art 393-395)
Article 393संक्षिप्त नाम (Short Title)
इस दस्तावेज का नाम "भारत का संविधान" (The Constitution of India) होगा।
Article 394प्रारंभ (Commencement)
संविधान के कुछ अनुच्छेद 26 नवंबर 1949 को लागू हुए, जबकि बाकी 26 जनवरी 1950 को लागू हुए।
Article 394Aहिंदी भाषा में प्राधिकृत पाठ
संविधान का हिंदी अनुवाद प्रकाशित करने और उसे कानूनी मान्यता देने का प्रावधान (58वें संशोधन द्वारा जोड़ा गया)।
Article 395निरसन (Repeals)
भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 और भारत शासन अधिनियम 1935 को इसके द्वारा निरस्त (cancel) कर दिया गया।

© 2023 भारतीय संविधान मार्गदर्शिका

यह एक शैक्षिक संसाधन है। कानूनी सलाह के लिए आधिकारिक स्रोतों से परामर्श करें।

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